गुरु गोरक्षनाथ

नाथ परम्परा की शुरुआत बहुत प्राचीन रही है, किंतु गोरखनाथ से इस परम्परा को सुव्यवस्थित विस्तार मिला। गोरखनाथ के गुरु मत्स्येन्द्रनाथ थे। दोनों को चौरासी सिद्धों में प्रमुख माना जाता है। गुरु गोरखनाथ के जन्म के विषय में जन मानस में एक किंम्बदन्ती प्रचलित है , जो कहती है कि गोरखनाथ ने सामान्य मानव के […]

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नाथ संप्रदाय

हिन्दुओं के मुख्‍यत: चार संप्रदाय है:- वैदिक, वैष्णव, शैव और स्मार्त। शैव संप्रदाय के अंतर्गत ही शाक्त, नाथ और संत संप्रदाय आते हैं। उन्हीं में दसनामी और 12 गोरखपंथी संप्रदाय शामिल है। जिस तरह शैव के कई उप संप्रदाय है उसी तरह वैष्णव और अन्य के भी। आओ जानते हैं कि किस तरह नाथ संप्रदाय […]

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योग पथ

भारतीय ऋषी,महर्षी और संतोके ऊर्ध्वमुखी मनन और चिंतन का फलित योग साधना है ! मनुष्य के अंदर असीम संभावनाए और शक्तीयां छुपी होती है लेकिन वह अज्ञान के कारण उनको पहचान नही पाते ! यदि हम साधना द्वारा अपनी छिपी एवं सुप्त शक्ती को जागृत कर ले तो कोई ऐसी बात नही जिसे हम सरलतापूर्वक […]

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सूचना / संकल्प

एक शिष्य जो गुरु के अधीन शिक्षा लेता हैं और गुरु के निर्देशों का पालन करते हुए अपना अभ्यास जारी रखता हैं, वह सफलतापूर्वक समाधि तक पहुंच ही जाता है ! लेकिन जो भक्त गुरु के बिना खुद अभ्यास करते हैं, वे या तो कुछ प्राप्त करते हैं, या वो कही बीच में फस जाते है […]

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" अखंड मंडल आकार वाले इस चर-अचर संसार में जो चल रहा है और उस मार्ग का जो दर्शन करावे, ऐसे हमारे सदगुरु पापाजी को समर्पित "

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