ॐ क्या है ?

ॐ क्या है ?

ॐ को लेकर एक दो-बातें गहरे उतार लेने की ज़रुरत है। पहली बात ॐ महज एक शब्द नहीं, ना ही ऊँ ध्वनिमात्र है और ना ही ॐ का किसी ख़ास धर्म से कोई लेना-देना है। गुरुनानक ने कहा “एक ओंकार सतनाम”- यानी ॐकार एक सत्य है। ॐ को सत्य के अलावा कुछ कहा भी नहीं जा सकता। हम जो भी कहें उसकी एक सीमा है और ॐकार असीम है, इसलिए प्राचीन योगियों ने ॐ को अजपा कहा-यानी जिसका जाप नहीं किया जा सकता। ॐ शब्दातीत है-यानी शब्द से परे। ॐ का हम मुख से रट लगा सकते हैं, लेकिन असल ऊँ तो ध्यान की गहराई में अवतरित होता है।
ऊँ ध्वनि भी नहीं, हम भले ही ॐ की ध्वनि मुख से निकाल लें, लेकिन ॐ को अनाहत नाद कहा गया है। अनाहत का अर्थ होता है जो किसी के टकराने से पैदा ना हुआ हो। जहां टकराहट हो वहां भला ऊँ कहां। भीतर जब बिल्कुल शांति हो, अंदर के हमारे सारे द्वंद मिट जाते हैं तो एक अनाहत नाद से हमारा संपर्क होता है-ऊँ से हम जुड़ पाते हैं।
ऊँ का आपके अंदर के सत्य और शुभ से लेना-देना है, उसका तथाकथित धर्मों से कुछ नहीं लेना-देना। सत्य तो हर धर्म की आत्मा है, इसलिए जाने अनजाने सभी मुख्य प्रचलित धर्मों में ऊँ को स्थान मिला है। हिंदू धर्म में ऊँ हर जगह स्थापित है, हर मंत्र की शुरुआत ऊँ से होती है। योग में भी साधना की शुरुआत और समापन ऊँ से ही की जाती है। सिख में ॐ को सतनाम बताया गया। वहीं जैन धर्म ईश्वर को माने ना माने ऊँ को जरुर मानता है। बौद्ध धर्म में ईश्वर और आत्म तत्व को लेकर भले ही मतभेद हो लेकिन ऊँ को लेकर पूर्ण सहमति है। इस्लाम में आमीन और ईसाइयों में आमेन या एमेन(Amen) ॐ का ही अलग तरह से उच्चारण है। वहीं ईसाइयों में प्रचलित पवित्र शब्द ओमनी पोटेंट(सर्वशक्तिमान), ओमनी प्रजेंट(सर्वव्यापी) जैसे शब्द ईश्वर के लिए बताया गया है। साफ देख सकते हैं कि ये शब्द ऊँ या ओम रुट से जुड़े हैं और योग शास्त्र में भी ऊँ को सभी शक्तियों से पूर्ण और सर्वव्यापी बताया गया है।
योग में ऊँ का इस्तेमाल शारीरिक-मानसिक-प्राणिक चिकित्सा के रुप में भी किया जाता है। चिकित्सा का एक ही धर्म होता है- ईलाज देना, तक़लीफ मिटा देना या कम करना। ऊँ को आप हीलिंग के रुप में ही सही अपनाकर अपना कल्याण कर सकते हैं।
सभी तरह की मानसिक बीमारियां या तक़लीफ की वजह हमारा मन है। मन के तल पे पैदा होने वाले हमारे खुद के विचार हमें मुसीबत में डाल देते हैं। जब हम ॐ का उच्चारण या चांटिंग करते हैं तो हमारा मन विचारों की दलदल से बाहर आने लगता है और लगातार अभ्यास से हम तनाव, डिप्रेशन अनिद्रा जैसी मन की बीमारियों से खुद को दूर कर पाते हैं।
जब हमारा शरीर-मन तनावग्रस्त होता है तो हम अपने आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली को असंतुलित कर देते हैं। गलत खानपान और बिगड़ा लाइफस्टाइल हार्मोन की दुनिया में भूकंप ले आता है। ऊँ चांटिंग से सूर्य और चंद्रनाड़ी (सिमपैथिक और पारासिमपैथिक नर्ब्स सिस्टम) में संतुलन आता है और इससे ना सिर्फ हमारे हार्मोन बल्कि सभी आंतरिक अंग सुचारु रुप से काम करने लगते हैं। ऐसे में ऊँ हमें थायराइड, डाइबिटीज़ जैसी हार्मोनल बीमारियों को मैनेज करने में मदद करता है।
पेट के आस-पास जमी चर्बी और मोटापा का सीधा संबंध आपके तनाव से है। अक्सर हम मानते हैं कि ज्यादा खाने से हमारा पेट चर्बी से युक्त हो गया है, जबकि ये गलत है। जब हम तनाव में होते हैं तो किडनी के ऊपर मौजूद एडरिनल ग्रंथी एक ख़ास तरह का हार्मोन तनाव से लड़ने के लिए रिलीज़ करता है। जब हमारा तनाव स्थाई होने लगता है तो लगातार रिलीज होने वाला ये हार्मोन वेली फैट यानी पेट की चर्बी को इक्ट्ठा करना शुरु करता है। रिसर्च मानता है कि ऊँ चांटिंग के वक्त हम तनाव को बहुत मजबूती से मैनेज कर पाते हैं और इसतरह हम पेट के पास अतिरिक्त चर्बी जमा होने से रोक सकते हैं।
डाइजिस्टिव सिस्टम यानी पाचन तंत्र में गड़बड़ी का ज्यादातर मामला तनाव की वजह से है। तनाव के वक्त शरीर अतिरिक्त ऊर्जा के लिए पाचन, मल-निकासी जैसे प्रक्रिया को टाल देता है। ऐसे में हमारा तनाव हमंे अपचन और कब्ज की ओर ले जाता है। ऊँ की चांटिंग से मन तनाव से छुटकारा पाता है और जैसे ही एकबार हमें तनाव से मुक्त होते हैं मस्तिष्क दूसरे कार्यों को भली-भांति शुरु कर देता है।
स्मरण शक्ति और एकाग्रता में भी ऊँ की चांटिंग से बहुत फ़ायदे हैं। हमने देखा कि एक ऊँ कई तरह की हमारी समस्या के लिए संजीवनी की तरह काम करता है। ऊँ के फ़ायदे को गिनाने यहां बैठूं तो शायद पेज कम पड़ जाएं लेकिन ऊँ का लाभ कम पड़ने वाला नहीं। ऐसे में आप ऊँ को लेकर बेवजह की राजनीतिक बहसों में ना ऊलझे, बल्कि ऊँ से जुड़ें, खुद से जुड़ें।

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Vinayak
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Vinayak

Very nice