आत्मा का संचार और ऊर्जा..

पहले तो यही बड़ा प्रश्न हैआत्मा क्या है ? शरीर के किस भाग में रहती है ? उसका स्वरुप क्या है ? क्यूँकि आत्मज्ञान ही ब्रम्हज्ञान है ! जिसने अपने आपको जान लिया उसने ब्रम्ह को जान लिया ! क्यूंकि अपना आप जो है वह ब्रम्ह का अंश है ! तो अगर हमने अंश को […]

गुरु और अध्यात्म

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः ! गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः !! ये पंक्तियाँ आपने सुनी होंगी या आप किसी मंदिर में जाते होंगे तो आप इसे हमेशा सुनते होंगे ! लेकिन दुःख की बात यह है कि बहोतसे लोगों को इसका अर्थ ही मालूम नहीं है ! “गुरुही ब्रम्हा-विष्णु-महेश हैं, वही परब्रम्ह है और […]

नाथ संप्रदाय

नाथसंप्रदायिकांच्या श्रद्धेनुसार श्रीदत्तात्रेय ही योगसिद्धी प्राप्त करून देणारी देवता आहे. उपास्य दैवत म्हणून नव्हे, तर सिद्धिदाता गुरू आणि अवधूतावस्थेचा आदर्श म्हणून नाथसंप्रदायात दत्तांचे महिमान गायलेले आहे. नाथपंथाचा महनीय वारसा घेऊन वारकरी संप्रदायाचे संजीवन करणारे श्रीज्ञानेश्वर हे नाथ परंपरेतील संत होत. ज्ञानेश्वरांच्या अभंग गाथेत ‘ज्ञानदेवांच्या अंतरी दत्तात्रेय योगिया’ असा दत्तविषयक एक अभंग आहे. नाथसंप्रदायामध्ये दत्तात्रेयांना फार […]

ॐ क्या है ?

ॐ क्या है ? ॐ को लेकर एक दो-बातें गहरे उतार लेने की ज़रुरत है। पहली बात ॐ महज एक शब्द नहीं, ना ही ऊँ ध्वनिमात्र है और ना ही ॐ का किसी ख़ास धर्म से कोई लेना-देना है। गुरुनानक ने कहा “एक ओंकार सतनाम”- यानी ॐकार एक सत्य है। ॐ को सत्य के अलावा […]

वैराग्य

वैराग्य वैराग्य का अर्थ है- रोगों को त्याग देना। राग मनोविकारों को, दुर्भावों और कुसंस्कारों को कहते हैं। अनावश्यक मोह, ममता, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, शोक, चिन्ता, तृष्णा, भय, कुढ़न आदि के कारण मनुष्य जीवन में बड़ी अशान्ति एवं उद्विग्नता रहती है। कितने ही लोग अपने को बड़ा दीन दुखी, अभाव ग्रस्त, संतप्त, अभागा समझते हैं […]